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Thursday, February 4, 2016

हमें छींक क्यों आती है ?

                                                      जब किसी व्यक्ति को छींक आती है, तो हमें लगता है इसे या तो सर्दी-जुकाम है या फिर एलर्जी। लेकिन ऐसा होता नहीं है।
                                दरअसल छींक शरीर की एक जटिल प्रतिक्रिया होती है। छींक उस समय आती है जब नाक की तंत्रिकाएं नाक की झिल्ली पर सूजन, छोटे-छोटे कण या कोई ऐसा पदार्थ देखती है, जो एलर्जी कर सकते हैं, फलस्वरूप उस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करती हैं। यही प्रतिक्रिया छींक के रूप में बाहर आती है। 

                                                चिकित्सा विज्ञान में छींकने के लिए 'स्टर्नुटेशन' शब्द का उपयोग किया जाता है और यह माना जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की नाक में 'स्टर्नुटेशन' कारक तत्व जैसे - मिर्च, ठंडी हवा या धूल चली जाए, तो नाक की तंत्रिकाएं दिमाग को इसकी जानकारी देती है। दिमाग गले, छाती और पेट को एक निर्दिष्ट तरीके से अपने को सिकोड़ने को कहता है, जिससे ये तत्व जल्दी शरीर से बाहर निकाले जा सके। जब दिमाग से भेजे गए संदेश का पालन होता है, तब छींक आती है।

Tuesday, February 11, 2014

क्यों होती है अपने हाथ से गुदगुदी ?


उत्तर - अगर गलती से किसी व्यक्ति का हाथ हमें अनजाने में छू जाए, तो हमें गुदगुदी होने लगती है। कुछ लोग तो गुदगुदी के इशारे मात्र से लोटपोट हो जाते हैं। इसके विपरीत यदि हम खुद अपने शरीर को गुदगुदाते हैं, तो किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं होती है।
                                हमारे दिमाग में कुछ इस तरह से प्रोग्राम होता है कि उसमें बाहरी संवेग और आंतरिक संवेगों को अलग करने में महारत हासिल होती है। दिमाग सबसे पहले उन संकेतों की अनदेखी करता है जो आंतरिक होते हैं, यानी जो व्यक्ति स्वयं अपने शरीर पर करता है। जब भी कोई व्यक्ति हमें गुदगुदाता है तो हंसी उसके कारण होने वाले आकस्मिक भय का ही रूप होती है। जब हम स्वयं खुद को गुदगुदाते हैं, तो हमें किसी प्रकार का भय नहीं रह जाता है।
                                  स्वयं को गुदगुदाने पर यह प्रतिक्रिया दिमाग के जिस हिस्से के कारण नहीं हो पाती है, उसे सेरेबेलम कहते हैं और यह दिमाग के पिछले हिस्से में स्थित होता है। यह दिमाग के अन्य हिस्सों को मिलने वाले संवेदात्मक संकेतों को नियंत्रित करने का काम करता है।