विभिन्न दैहिक क्रियाओं के सुचारू रूप से संचालन के लिए होने वाली भूख की अनुभूति आहारनाल के क्रमाकुंचन एवं संकुचन के कारण होती है। माइक्रोविलाई की सतह पर उपस्थित संग्राहकों (Receptors) के द्वारा यह संवेद मस्तिष्क में पहुंचता है, जो कि रक्त में ग्लूकोज की कमी तथा तापमान में गिरावट, आमाशय में संकुचन आदि। इन्हीं कारणों से हमें भूख की अनुभूति होती है।
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Monday, April 13, 2015
Sunday, March 29, 2015
पीलिया रोग (Jaundice) क्यों उत्पन्न होता है ?
पित्ताशय से पित्तवाहिनी में पित्त का मार्ग अवरुद्ध हो जाने पर यकृत कोशाएं रक्त से बाइलीरुबिन (Bilirubin) पित्त रंग को ग्रहण करना बंद कर देती है। अत: पीला पित्त रंग बाइलीरुबिन रक्त में ही रहकर पूरे शरीर में फैल जाता है। जिससे त्वचा एवं आँखों का रंग पीला पड़ जाता है और मूत्र पीला-हरा सा एवं मल भूरा हो जाता है। इसी को पीलिया रोग ( Jaundice) कहते हैं।
Wednesday, February 4, 2015
टाईफाइड क्यों होता है ?
टाइफाइड एक तरह के जीवाणु से फैलता है। आयुर्विज्ञान की भाषा में इसे बैसिलस सेलमोनेला टायफोसा कहा जाता है। यह एक भयानक संक्रामक रोग है। बहुत पहले हजारों लोग इस महामारी से काल कलवित हो जाते थे, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान के विकास से इस पर काबू पा लिया गया है।
यह गंदे भोजन या गंदे पानी के साथ शरीर में प्रवेश करके खून तक पहुंच जाता है। यह खून को प्रभावित करके पूरी रक्त व्यवस्था को दूषित कर देता है। इस बीमारी में बुखार, खांसी, खाल का उधड़ना, तिल्ली का बढ़ जाना और श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी हो जाना आदि होता है। इस बीमारी में भूख भी कम लगती है और लगातार बुखार रहता है।
टाइफाइड के जीवाणु पकने से पहले भोजन सामग्री में भी वाहक द्वारा पंहुच सकते हैं। मक्खियां भी इन जीवाणुओं को इधर से उधर पहुंचाती हैं। टाइफाइड की बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी शरीर में ये जीवाणु बचे रह जाते हैं। टाइफाइड की जांच के लिए विडेल टेस्ट किया जाता है। इसमें खून की जांच की जाती है।
यह गंदे भोजन या गंदे पानी के साथ शरीर में प्रवेश करके खून तक पहुंच जाता है। यह खून को प्रभावित करके पूरी रक्त व्यवस्था को दूषित कर देता है। इस बीमारी में बुखार, खांसी, खाल का उधड़ना, तिल्ली का बढ़ जाना और श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी हो जाना आदि होता है। इस बीमारी में भूख भी कम लगती है और लगातार बुखार रहता है।
टाइफाइड के जीवाणु पकने से पहले भोजन सामग्री में भी वाहक द्वारा पंहुच सकते हैं। मक्खियां भी इन जीवाणुओं को इधर से उधर पहुंचाती हैं। टाइफाइड की बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी शरीर में ये जीवाणु बचे रह जाते हैं। टाइफाइड की जांच के लिए विडेल टेस्ट किया जाता है। इसमें खून की जांच की जाती है।
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