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Saturday, October 10, 2015

वायुमंडल में ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन आदि बहुत सी गैसें हैं, लेकिन हम इनमें से ऑक्सीजन किस तरह से ग्रहण कर लेते हैं ?



                 उत्तर - वायुमंडल में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि बहुत सारी गैसें होती है। जब हम अपने फेफड़ों के द्वारा सांस लेते हैं तो वायुमंडल में उपस्थित गैसें हमारे फेफड़ों में भर जाती है। इसी समय फेफड़ों की रक्त-नलिकाओं में उपस्थित हिमोग्लोबिन फेफड़ों में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके ऑक्सी हीमोग्लोबिन (oxi-heamoglobin) का निर्माण करती है जो अशुद्ध रक्त को शुद्ध रक्त में परिवर्तित करती है।
फेफड़ों में उपस्थित अन्य गैसें बाहर निकाल दी जाती हैं। इस प्रकार वायुमंडल में उपस्थित ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि गैसों में से केवल ऑक्सीजन ही ग्रहण करते हैं।

Tuesday, June 16, 2015

वायुमंडल में ताप संतुलन (Heat Balance of the Atmosphere) क्या है ?


                      पृथ्वी को अधिकांश ऊष्मा (Heat) सूर्य से विकीर्ण ताप द्वारा प्राप्त होती है। सूर्य से विकीर्ण ताप लघु तरंगों ( Short Waves) द्वारा पृथ्वी को प्राप्त होता है। वायुमंडल सूर्य से विकीर्ण ऊर्जा (Energy) का केवल 14 प्रतिशत प्रत्यक्ष रूप में प्राप्त करता है। वायुमंडल को अधिकांश ताप की प्राप्ति (अप्रत्यक्ष रूप से), पृथ्वी से विकीर्ण ऊर्जा द्वारा प्राप्त होती है, जो कि दीर्घ तरंगों (Long Waves) के रूप में होती है। इस प्रकार पृथ्वी एवं वायुमंडल निरंतर सूर्य से ऊष्मा प्राप्त करते हैं। लेकिन यह उल्लेखनीय है कि फिर भी पृथ्वी तथा वायुमंडल का ऊष्मा भंडार बढ़ता या घटता नहीं, बल्कि सदैव संतुलित रहता है कि इसका तात्पर्य है कि पृथ्वी तथा वायुमंडल जितना ताप प्राप्त करते हैं, उतना ही शून्य में लौट जाता है।

Saturday, May 2, 2015

पृथ्वी का निर्माण किस प्रकार हुआ ?


                                पृथ्वी उत्पत्ति ग्रहाणुओं के एक ठंडे समूह से हुई। ये ग्रहाणुओं आंतरिक ग्रहों के क्षेत्र में मुख्यत: सिलिकन, लोहा, मैग्नीशियम के यौगिकों के साथ सूक्ष्म मात्रा में अन्य तत्वों के मिलने से बने थे। जैसे-जैसे और अधिक ग्रहाणु पृथ्वी से टकराते गये वैसे-वैसे वे इससे जुड़ते गये। इन ग्रहाणुओं की गतिज ऊर्जा टक्करों के कारण उष्मीय ऊर्जा में बदलती गई। इससे इसका ताप भी बढ़ता गया। इसके अतिरिक्त पृथ्वी के संपीडन एवं रेडियोएक्टिव विघटन के कारण यह ग्रह और गर्म होता रहा तथा अपनी उत्पत्ति के लगभग 80 करोड़ वर्ष बाद पिघल गया। इस ग्रह ने गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव की सहायता से सहायता से स्वयं को व्यवस्थित करना प्रारंभ कर दिया। लोहा पिघलकर इसके केंद्र की ओर गिरने लगा तथा हल्के पदार्थ पृथ्वी के सतह पर आ गये। इससे भूपर्पटी का निर्माण हुआ। गुरुत्वाकर्षण के कारण केंद्र में पहुंचे लोहे से क्रोड का निर्माण हुआ। बीच का भाग प्रवार बना। विभेदन के फलस्वरूप वायुमंडल, सागर, महासागरों तथा  महाद्वीपों का निर्माण हुआ। इस प्रकार पृथ्वी की उत्पत्ति हुई।