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Wednesday, February 4, 2015

टाईफाइड क्यों होता है ?

               
                             टाइफाइड एक तरह के जीवाणु से फैलता है। आयुर्विज्ञान की भाषा में इसे बैसिलस सेलमोनेला टायफोसा कहा जाता है। यह एक भयानक संक्रामक रोग है। बहुत पहले हजारों लोग इस महामारी से काल कलवित हो जाते थे, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान के विकास से इस पर काबू पा लिया गया है।
                             यह गंदे भोजन या गंदे पानी के साथ शरीर में प्रवेश करके खून तक पहुंच जाता है। यह खून को प्रभावित करके पूरी रक्त व्यवस्था को दूषित कर देता है। इस बीमारी में बुखार, खांसी, खाल का उधड़ना, तिल्ली का बढ़ जाना और श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी हो जाना आदि होता है। इस बीमारी में भूख भी कम लगती है और लगातार बुखार रहता है।
                               टाइफाइड के जीवाणु पकने से पहले भोजन सामग्री में भी वाहक द्वारा पंहुच सकते हैं। मक्खियां भी इन जीवाणुओं को इधर से उधर पहुंचाती हैं। टाइफाइड की बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी शरीर में ये जीवाणु बचे रह जाते हैं। टाइफाइड की जांच के लिए विडेल टेस्ट किया जाता है। इसमें खून की जांच की जाती है।

Saturday, October 25, 2014

मधुमक्खियां शहद कैसे बनाती हैं ?


उत्तर - शहद की मक्खियों की भी बस्तियां होती हैं। इनकी एक बस्ती में 60 हजार तक मक्खियां हो सकती हैं। मक्खियों के कई काम हैं। शुरू में ये छत्तों की सफाई और पॉलिश करने का काम करती हैं। कुछ दिनों बाद ये अंडों से निकले बच्चों का पालन-पोषण करती हैं और फिर फूलों के पराग से शहद जुटाने के लिए जाती हैं।
                              क्या आप जानते हैं कि मक्खियां फूलों के रस को शहद में कैसे बदल देती हैं। शहद इन मक्खियों का भोजन होता है, अत: शहद बनाने का काम अपनी बस्तियों की मक्खियों के लिए भोजन जुटाने का काम है। शहद जुटाने के लिए ये मक्खियां फूलों पर जाती हैं। फूलों में पुष्प रस होता है, जिसे ये मक्खियां चूस कर अपनी शहद की थैली में जमा कर छत्ते तक जाती हैं। 
                              शहद की  थैली मक्खी के पेट के पास होती है। पेट पर इस थैली को अलग करने के लिए बीच में एक वाल्व होता है। पुष्प रस (नेक्टर) में उपस्थित चीनी में एक रासायनिक परिवर्तन होता है। नेक्टर में जो पानी होता है, वह छत्ते से वाष्पीकरण द्वारा उड़ जाता है। इसके बाद यह शहद छत्ते में बहुत समय तक रखा जा सकता है।