Friday, March 6, 2015

फोड़ा-फुंसी होने पर बगल में या जांघ के पास गिल्टियाँ क्यों निकल आती हैं ?


                             फोड़ा-फुंसी होने पर जांघ के पास निकली गिल्टियाँ वास्तव में फूली हुई लसिका ग्रन्थियां (Lymph glands) होती हैं जो हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए श्वेत रुधिर कणिकाओं का अधिक संख्या में निर्माण तथा एकत्रित करने हेतु फूलकर बड़ी हो जाती हैं।

चींटी के काटने पर तेज जलन क्यों होती है ?


                                लाल चींटी, बर्र के डंक आदि में फार्मिक अम्ल होता है। चींटी इस फ़ॉर्मिक अम्ल को त्वचा में प्रवेश करा देती है जिससे तेज जलन होती है।

Thursday, February 26, 2015

क्या हीरा जहरीला होता है और इसे खाने से मृत्यु हो जाती है ?


                                   हीरा जहरीला नहीं होता है, और इसे चाटने से मृत्यु नहीं होती है लेकिन यदि हीरे को निगल लिया जाए तो मौत हो जाती है। इसका कारण यह है कि हीरे में अनेक Face या फलक होते हैं। और चूंकि हीरा सबसे अधिक कठोर वस्तु होता है इस कारण से इसके फलक हमारे आहार नाल को काटते हुए आगे बढ़ते हैं ज्यों-ज्यों हीरा आहार नाल में आगे बढ़ता है हीरा आहार नाल को काटते जाता है। आहार नाल के कट जाने के कारण Internal Bleeding आंतरिक रक्तस्राव होने लगती है और व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

Sunday, February 22, 2015

तेज धूप में खड़े रहने के बाद जब हम कमरे में जाते हैं तो हमें कुछ दिखाई क्यों नहीं देता है ?


                          तेज धूप में या अधिक प्रकाश में हमारी आँख की पुतली का आयरिश पेशियों (Muscles) के द्वारा व्यास कम हो जाता है। जिससे बहुत अधिक तेज प्रकाश आँख में प्रवेश न कर सके (कैमरे में यही कार्य शटर द्वारा किया जाता है) जब हम तेज धूप में खड़े रहने के पश्चात कमरे में जाते हैं, तो पुतली (Pupil) के फैलने से पुन: अधिक प्रकाश आँख में जा सकता है, किंतु पुतली के फैलने एवं सिकुड़ने में कुछ समय लगता है। अत: तेज धूप से कमरे में जाने पर कुछ समय तक बहुत कम प्रकाश आँख में पहुंच पाने के कारण कुछ दिखाई नहीं देता है।

Saturday, February 21, 2015

हमारे हाथों में उभरी हुई नसें जिनमें खून बहता है। वे बाहर से नीली या हरी क्यों दिखाई देती हैं ?


                               रक्त में हिमोग्लोबिन नामक लाल पदार्थ होता है। इसकी विशेषता यह है कि कार्बन डाइऑक्साइड एवं ऑक्सीजन दोनों के साथ प्रति वतर्यता (Reversibly) से जुड़ सकता है। हिमोग्लोबिन जब शरीर के ऊतकों से कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करता है, वह कार्बोक्सी हिमोग्लोबिन कहलाता है। कार्बोक्सी हिमोग्लोबिन वाला रक्त अशुद्ध होता है जो शिराओं से होकर फेफड़ों में श्वांस लेने की प्रक्रिया में हीमोग्लोबिन कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़कर शुद्ध ऑक्सीजन ग्रहण करता है। यह शुद्ध रक्त धमनियों द्वारा कोशिकाओं तक पहुंचता है। अशुद्ध रक्त का रंग नील लोहित या बैंगनी होता है। शिराओं की भित्तियां पतली होती हैं और ये त्वचा के ठीक नीचे होती हैं। इसीलिए ऊपर से शिराओं को देखना आसान होता है। अशुद्ध नील लोहित रंग के रक्त के कारण शिराएं हमें नीले रंग की दिखाई देती हैं। शिराओं की तुलना में धमनियों की भित्ति अधिक मोटी होती है और काफी गहराई में स्थित होती है। इस कारण लाल रक्त प्रवाहित होने वाली धमनी हमें दिखाई नहीं देती है।

Wednesday, February 4, 2015

टाईफाइड क्यों होता है ?

               
                             टाइफाइड एक तरह के जीवाणु से फैलता है। आयुर्विज्ञान की भाषा में इसे बैसिलस सेलमोनेला टायफोसा कहा जाता है। यह एक भयानक संक्रामक रोग है। बहुत पहले हजारों लोग इस महामारी से काल कलवित हो जाते थे, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान के विकास से इस पर काबू पा लिया गया है।
                             यह गंदे भोजन या गंदे पानी के साथ शरीर में प्रवेश करके खून तक पहुंच जाता है। यह खून को प्रभावित करके पूरी रक्त व्यवस्था को दूषित कर देता है। इस बीमारी में बुखार, खांसी, खाल का उधड़ना, तिल्ली का बढ़ जाना और श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी हो जाना आदि होता है। इस बीमारी में भूख भी कम लगती है और लगातार बुखार रहता है।
                               टाइफाइड के जीवाणु पकने से पहले भोजन सामग्री में भी वाहक द्वारा पंहुच सकते हैं। मक्खियां भी इन जीवाणुओं को इधर से उधर पहुंचाती हैं। टाइफाइड की बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी शरीर में ये जीवाणु बचे रह जाते हैं। टाइफाइड की जांच के लिए विडेल टेस्ट किया जाता है। इसमें खून की जांच की जाती है।

Sunday, January 11, 2015

कई तारे बड़े होने पर भी सूर्य से बहुत छोटे क्यों दिखाई देते हैं ?


                                     दूसरे तारों के मुकाबले सूर्य बड़ा तथा चमकीला इसलिए दिखाई देता है, क्योंकि यह दूसरे तारों की अपेक्षा करीब है। इसके विपरीत अनेक तारे सूर्य से कई गुना बड़े होते हुए भी हमें छोटे तथा कम चमकीले दिखाई देते हैं, क्योंकि वे सूर्य की अपेक्षा पृथ्वी से बहुत दूर स्थित हैं।

Friday, January 9, 2015

पृथ्वी की आयु कितनी है इसे किस आधार पर तय किया गया है ?


पृथ्वी की आयु का अनुमान कई विधियों द्वारा तय किया गया है।
1. लवणता के आधार पर पृथ्वी की आयु 9 से 10 करोड़ वर्ष है।
2. शैल स्तरों की मोटाई के आधार पर पृथ्वी की आयु 51 करोड़ वर्ष है।
3. पृथ्वी के ठंडी होने की दर के आधार पर 10 करोड़ वर्ष है।
4. विकासीय प्रक्रम के आधार पर पृथ्वी की आयु 100 करोड़ वर्ष है।
5. रेडियो एक्टिव विधि द्वारा पृथ्वी की आयु 450 करोड़ वर्ष पुरानी है, जो वास्तविक है।

Thursday, January 8, 2015

माइक्रोवेव ओवन क्यों कहा जाता है ?


उत्तर - माइक्रोवेव ओवन प्रयोग करने हेतु धातु के बॉक्स में खाने का सामान रखा जाता है और उसका ढक्कन बंद कर एक स्विच दबा दिया जाता है। स्विच दबते ही बॉक्स के अंदर ऊर्जा की अदृश्य किरणें भोज्य सामग्री पर तेजी से गिरना शुरू हो जाती है। इसमें जिन किरणों के द्वारा भोजन को गर्म किया या पकाया जाता है, उनको माइक्रोवेव कहते हैं और इसीलिए इसको माइक्रोवेव ओवन नाम दिया गया है।

Wednesday, December 31, 2014

पहाड़ों पर चढ़ते समय लोग सामने की ओर क्यों झुक जाते हैं ?


उत्तर - पहाड़ों पर चढ़ते समय लोग आगे की ओर झुककर साम्य अवस्था बनाए रखते हैं। चढ़ते समय यात्री का गुरुत्वाकर्षण का केंद्र अपनी सामान्य स्थिति से हट जाता और इस प्रकार उसे गिरने का डर बना रहता है। आगे की ओर झुक जाने से गुरुत्वाकर्षण केंद्र पुन: सामान्य स्थिति में आ जाता है और चढ़ना आसान हो जाता है। अत: गुरुत्वाकर्षण केंद्र का संतुलन ठीक बनाए रखने के लिए यात्री चढ़ते समय आगे की ओर झुक जाते हैं।

Tuesday, December 30, 2014

दोमुंहे बालों का राज

सुंदरता बढ़ाने में बालों का विशेष योगदान होता है। यदि बालों संबंधी समस्या आ जाये तो व्यक्ति चिंतित हो उठता है। बालों की समस्याओं में से एक है दोमुंहे बाल होना। क्या आपको मालूम है बाल दोमुंहे क्यों होते हैं? कारण यह है कि बालों पर एक चमकदार व सुरक्षित परत होती है जिसे क्यूटिकल कहते हैं। जब यह परत टूटती है, तो बालों के सिरे भी टूटने लगते हैं। अधिकांशत: बालों के अत्यधिक सूखे और कमजोर होने के कारण भी बाल दोमुंहे होने लगते हैं। यदि बालों पर से एक बार क्यूटिकल हट जाए, तो इसे फिर से हासिल करना असंभव होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दोमुंहे बालों का सबसे अच्छा इलाज यही है कि उन्हें काट दिया जाए। बालों की नियमित रूप से कांट-छांट कर उन्हें दोमुंहा होने से बचाया जा सकता है।
गीले बालों में कंघी करने से भी बालों की सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचता है और यह भी बालों के दोमुंहे होने का कारण बनता है। इसके साथ ही जोर-जोर से कंघी करने से तथा धूप में अधिक देर तक रहने से भी बाल कमजोर होते है। इनसे बचना चाहिए।

Tuesday, December 16, 2014

विज्ञान प्रश्न - ठंड के दिनों में नारियल का तेल कैसे जम जाता है, जबकि सरसों का तेल क्यों नहीं जमता ?


उत्तर - ठण्ड के दिनों में नारियल का तेल जम जाता है, जबकि सरसों का तेल नहीं जमता। यह उस वसा अम्ल की प्रकृति द्वारा निर्धारित होता है, जिससे वसा का अणु बना है। कुछ वसा अम्लों के अणुओं में एक या अधिक द्वि-आबंध होते हैं। इनको असंतृप्त वसा कहते हैं। इन वसाओं का द्रवनांक कम होते हैं। सरसों का तेल भी इसी श्रेणी में आता है। अत: इसका द्रवनांक भी कम होता है। जबकि नारियल का तेल संतृप्त वसा है। अत: अधिक स्थायी है। अधिक स्थायी होने की प्रवृत्ति के कारण ही नारियल का तेल जम जाता है। जबकि सरसों का तेल कम द्रवनांक होने के कारण नहीं जमता।


Monday, November 17, 2014

क्यों आती है सांसों से बदबू ?


उत्तर - हेलीटोसिस, अर्थात सांसों से बदबू आना ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में लोग सतर्क नहीं रहते हैं। आइये जानें क्यों आती है सांसों से बदबू। सांसों में आने वाली बदबू के लिए वाष्पीकृत सल्फर यौगिक जिम्मेदार होते हैं, जैसे हाइड्रोजन सल्फाईड, मिथाइल मर्कैप्टन आदि। इन यौगिकों के स्रोत ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो ऑक्सीजन के बिना भी जीवित रह सकते हैं। ये बैक्टीरिया मुख के भीतरी दीवार की कोशिकाओं, जीभ, मसूढ़ों और दांतों की संधि के बीच रहते हैं। यह स्थान इनके लिए उपयुक्त रहते हैं क्योंकि अंधेरे और शुष्क स्थान पर ही ये पलते बढ़ते हैं। इसके अतिरिक्त सिगरेट, शराब इत्यादि नशीले पदार्थों का सेवन और कुछ भोज्य और पेय पदार्थों के कारण भी सांसों से बदबू आती है। खाने में दुग्ध उत्पाद, मसालेदार खाना, शक्करयुक्त पदार्थ और कॉफ़ी इत्यादि इन बैक्टीरिया की संख्या में वृद्धि करते हैं जो सल्फर यौगिक पैदा करते हैं। मसूढ़ों में होने वाला संक्रमण और रोग भी सांसों में बदबू पैदा करते हैं। दांतों में फंसे अन्न के कणों के सड़ने के कारण से यहां बैक्टीरिया पनपते हैं और फिर यह बैक्टीरिया सल्फरयुक्त यौगिक बनाते हैं, जो सांसों में बदबू का कारण बन जाता है।


Wednesday, November 12, 2014

क्यों आती है पैरों से बदबू ?


उतर - कोई भी व्यक्ति जब जूते निकलता है, तो उसके पैरों से अजीब सी बदबू आती है। सामान्यत: कहा जाता है कि मोजे में बंद होने के कारण दुर्गंध आती है। कुछ लोगों का यह मानना होता है कि मोजे साफ नहीं होना इस दुर्गंध का कारण होता है। दरअसल, पैरों से आने वाली दुर्गंध का मुख्य कारण वह बैक्टीरिया या जीवाणु होते हैं, जो पसीने के कारण पैरों में उत्पन्न होते हैं। ये कीटाणु पैरों में पाई जाने वाली करीब दो लाख 50 हजार स्वेद ग्रंथियों से होने वाले स्राव का सेवन करते हैं और इनकी मौजूदगी ही दुर्गंध का कारण बनती है।
                                जिन व्यक्तियों को अधिक पसीना आता है, उनके पैरों से आने वाली गंध भी काफी तीखी होती है, जबकि कम पसीने वाले व्यक्तियों के पैरों से अपेक्षाकृत कम दुर्गंध आती है। इस दुर्गंध को और बढ़ाने का काम जूते और मोजे करते हैं, जिनके कारण पसीना पैरों में भी फंस कर रह जाता है और यह गीलापन व अंधेरा बैक्टीरिया को और आकर्षित करता है। इस दुर्गंध से बचने के लिए ही व्यक्ति ऐसे मोजे पहनते हैं, जो पसीना सोखकर पैरों को सूखा रखने में मदद करते हैं।



Saturday, October 25, 2014

मधुमक्खियां शहद कैसे बनाती हैं ?


उत्तर - शहद की मक्खियों की भी बस्तियां होती हैं। इनकी एक बस्ती में 60 हजार तक मक्खियां हो सकती हैं। मक्खियों के कई काम हैं। शुरू में ये छत्तों की सफाई और पॉलिश करने का काम करती हैं। कुछ दिनों बाद ये अंडों से निकले बच्चों का पालन-पोषण करती हैं और फिर फूलों के पराग से शहद जुटाने के लिए जाती हैं।
                              क्या आप जानते हैं कि मक्खियां फूलों के रस को शहद में कैसे बदल देती हैं। शहद इन मक्खियों का भोजन होता है, अत: शहद बनाने का काम अपनी बस्तियों की मक्खियों के लिए भोजन जुटाने का काम है। शहद जुटाने के लिए ये मक्खियां फूलों पर जाती हैं। फूलों में पुष्प रस होता है, जिसे ये मक्खियां चूस कर अपनी शहद की थैली में जमा कर छत्ते तक जाती हैं। 
                              शहद की  थैली मक्खी के पेट के पास होती है। पेट पर इस थैली को अलग करने के लिए बीच में एक वाल्व होता है। पुष्प रस (नेक्टर) में उपस्थित चीनी में एक रासायनिक परिवर्तन होता है। नेक्टर में जो पानी होता है, वह छत्ते से वाष्पीकरण द्वारा उड़ जाता है। इसके बाद यह शहद छत्ते में बहुत समय तक रखा जा सकता है।