Saturday, May 2, 2015

पृथ्वी का निर्माण किस प्रकार हुआ ?


                                पृथ्वी उत्पत्ति ग्रहाणुओं के एक ठंडे समूह से हुई। ये ग्रहाणुओं आंतरिक ग्रहों के क्षेत्र में मुख्यत: सिलिकन, लोहा, मैग्नीशियम के यौगिकों के साथ सूक्ष्म मात्रा में अन्य तत्वों के मिलने से बने थे। जैसे-जैसे और अधिक ग्रहाणु पृथ्वी से टकराते गये वैसे-वैसे वे इससे जुड़ते गये। इन ग्रहाणुओं की गतिज ऊर्जा टक्करों के कारण उष्मीय ऊर्जा में बदलती गई। इससे इसका ताप भी बढ़ता गया। इसके अतिरिक्त पृथ्वी के संपीडन एवं रेडियोएक्टिव विघटन के कारण यह ग्रह और गर्म होता रहा तथा अपनी उत्पत्ति के लगभग 80 करोड़ वर्ष बाद पिघल गया। इस ग्रह ने गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव की सहायता से सहायता से स्वयं को व्यवस्थित करना प्रारंभ कर दिया। लोहा पिघलकर इसके केंद्र की ओर गिरने लगा तथा हल्के पदार्थ पृथ्वी के सतह पर आ गये। इससे भूपर्पटी का निर्माण हुआ। गुरुत्वाकर्षण के कारण केंद्र में पहुंचे लोहे से क्रोड का निर्माण हुआ। बीच का भाग प्रवार बना। विभेदन के फलस्वरूप वायुमंडल, सागर, महासागरों तथा  महाद्वीपों का निर्माण हुआ। इस प्रकार पृथ्वी की उत्पत्ति हुई।

Thursday, April 23, 2015

कैरेट से क्या तात्पर्य है ?

कैरेट सिस्टम को किसी भी ज्वैलरी या सोने के आभूषण में मौजूद शुद्ध सोने की मात्रा जानने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। दूसरे शब्दों में एलॉय में मौजूद सोने के हिस्से के आकलन की इकाई को कैरेट कहा जाता है।
24 कैरेट सोने को शुद्ध सोना माना जाता है। यदि सोना 18 कैरेट का है इसका मतलब है कि इसमें 18 हिस्सा सोना है और छह हिस्सा दूसरे मेटल का। यानि 75 प्रतिशत शुद्ध सोने वाली ज्वैलरी को 18 कैरेट माना जाता है। इसी तरह 22 कैरेट का मतलब हुआ इसमें 22 भाग सोना है और दो भाग मेटल।

Monday, April 13, 2015

हमें भूख की अनुभूति क्यों होती है ?


                               विभिन्न दैहिक क्रियाओं के सुचारू रूप से संचालन के लिए होने वाली भूख की अनुभूति आहारनाल के क्रमाकुंचन एवं संकुचन के कारण होती है। माइक्रोविलाई की सतह पर उपस्थित संग्राहकों (Receptors) के द्वारा यह संवेद मस्तिष्क में पहुंचता है, जो कि रक्त में ग्लूकोज की कमी तथा तापमान में गिरावट, आमाशय में संकुचन आदि। इन्हीं कारणों से हमें भूख की अनुभूति होती है।

Thursday, April 9, 2015

शिशु के लिए माता का दूध क्यों सर्वोत्तम है ?


                                शिशु के लिए माँ का दूध ही सर्वोत्तम है क्योंकि इसमें बच्चे की वृद्धि एवं विकास के लिए सभी पोषक तत्व होते हैं। पोषक तत्वों के अतिरिक्त माँ के दूध से शिशु को रक्षात्मक प्रोटीन मिलती है जिन्हें प्रतिरक्षी कहते हैं इससे शिशु को रोगों से लड़ने के लिए आवश्यक शक्ति प्राप्त होती है।

Friday, April 3, 2015

नाखून काटने पर हमें दर्द क्यों नहीं होता है ?


                     नाखून में किसी प्रकार की तंत्रिकाएं नहीं होती है। इसलिए इन्हें काटने पर कोई दर्द नहीं होता है।

Sunday, March 29, 2015

पीलिया रोग (Jaundice) क्यों उत्पन्न होता है ?


                                  पित्ताशय से पित्तवाहिनी में पित्त का मार्ग अवरुद्ध हो जाने पर यकृत कोशाएं रक्त से बाइलीरुबिन (Bilirubin) पित्त रंग को ग्रहण करना बंद कर देती है। अत: पीला पित्त रंग बाइलीरुबिन रक्त में ही रहकर पूरे शरीर में फैल जाता है। जिससे त्वचा एवं आँखों का रंग पीला पड़ जाता है और मूत्र पीला-हरा सा एवं मल भूरा हो जाता है। इसी को पीलिया रोग ( Jaundice) कहते हैं।

Wednesday, March 25, 2015

जब सोडा वाटर की बोतल को खोलते हैं, तो तेजी से झाग क्यों उत्पन्न होते हैं ?


             सोडा वाटर की बोतल में कार्बन डाइऑक्साइड गैस उच्च दाब पर भरी रहती है। जब बोतल की कार्क को खोलते हैं, तो दाब कम हो जाता है जिससे जल में घुली कार्बन डाइऑक्साइड तेजी से बुलबुले के रूप में बाहर निकलती है इसी कारण झाग उत्पन्न होते हैं।

Wednesday, March 18, 2015

पीपल की नयी पत्तियां लाल-भूरी जबकि परिपक्व पत्तियां हरी क्यों दिखाई देती हैं ?


                                पीपल के पेड़ की नयी पत्तियां लाल-भूरी दिखाई देती हैं क्योंकि इनमें फायकोजैंथिन तथा फायकोइरिथिन वर्णक होते हैं। लेकिन परिपक्व होने पर यह वर्णक क्लोरोफिल 'ए' तथा क्लोरोफिल 'बी' में बदल जाते हैं। प्रकाश की उपस्थिति में यह परिपक्व पत्तियां हरी दिखाई देती हैं।

Monday, March 16, 2015

क्लोनिंग क्या है ?


                                     'क्लोन' एक जीव (रचना) है जो गैर-यौनिक विधि द्वारा एकल पैरेंट (माता-पिता में से कोई एक) में व्युत्पन्न होता है। क्लोन शारीरिक रूप से नहीं, वरन आनुवांशिक गुणों में भी अपनी मां (या पिता) के समरूप होता है। वास्तव में एक क्लोन अपनी मां का प्रतिरूप होता है जबकि इसके विपरीत सामान्य यौगिक प्रजनन के द्वारा पैदा हुए बच्चे में मां व पिता दोनों के आनुवांशिक गुण समाहित होते हैं।
                                   जिस विधि या तकनीक द्वारा ' क्लोन' पैदा होता है, उसे 'क्लोनिंग तकनीक' कहा जाता है। परम्परागत रूप से क्लोनिंग तकनीक कृषि और बागवानी विशेषज्ञों में काफी प्रचलित रही है। वैसे भी 'क्लोन' शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ 'टहनी' (Twig) होता है।


Friday, March 6, 2015

फोड़ा-फुंसी होने पर बगल में या जांघ के पास गिल्टियाँ क्यों निकल आती हैं ?


                             फोड़ा-फुंसी होने पर जांघ के पास निकली गिल्टियाँ वास्तव में फूली हुई लसिका ग्रन्थियां (Lymph glands) होती हैं जो हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए श्वेत रुधिर कणिकाओं का अधिक संख्या में निर्माण तथा एकत्रित करने हेतु फूलकर बड़ी हो जाती हैं।

चींटी के काटने पर तेज जलन क्यों होती है ?


                                लाल चींटी, बर्र के डंक आदि में फार्मिक अम्ल होता है। चींटी इस फ़ॉर्मिक अम्ल को त्वचा में प्रवेश करा देती है जिससे तेज जलन होती है।

Thursday, February 26, 2015

क्या हीरा जहरीला होता है और इसे खाने से मृत्यु हो जाती है ?


                                   हीरा जहरीला नहीं होता है, और इसे चाटने से मृत्यु नहीं होती है लेकिन यदि हीरे को निगल लिया जाए तो मौत हो जाती है। इसका कारण यह है कि हीरे में अनेक Face या फलक होते हैं। और चूंकि हीरा सबसे अधिक कठोर वस्तु होता है इस कारण से इसके फलक हमारे आहार नाल को काटते हुए आगे बढ़ते हैं ज्यों-ज्यों हीरा आहार नाल में आगे बढ़ता है हीरा आहार नाल को काटते जाता है। आहार नाल के कट जाने के कारण Internal Bleeding आंतरिक रक्तस्राव होने लगती है और व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

Sunday, February 22, 2015

तेज धूप में खड़े रहने के बाद जब हम कमरे में जाते हैं तो हमें कुछ दिखाई क्यों नहीं देता है ?


                          तेज धूप में या अधिक प्रकाश में हमारी आँख की पुतली का आयरिश पेशियों (Muscles) के द्वारा व्यास कम हो जाता है। जिससे बहुत अधिक तेज प्रकाश आँख में प्रवेश न कर सके (कैमरे में यही कार्य शटर द्वारा किया जाता है) जब हम तेज धूप में खड़े रहने के पश्चात कमरे में जाते हैं, तो पुतली (Pupil) के फैलने से पुन: अधिक प्रकाश आँख में जा सकता है, किंतु पुतली के फैलने एवं सिकुड़ने में कुछ समय लगता है। अत: तेज धूप से कमरे में जाने पर कुछ समय तक बहुत कम प्रकाश आँख में पहुंच पाने के कारण कुछ दिखाई नहीं देता है।

Saturday, February 21, 2015

हमारे हाथों में उभरी हुई नसें जिनमें खून बहता है। वे बाहर से नीली या हरी क्यों दिखाई देती हैं ?


                               रक्त में हिमोग्लोबिन नामक लाल पदार्थ होता है। इसकी विशेषता यह है कि कार्बन डाइऑक्साइड एवं ऑक्सीजन दोनों के साथ प्रति वतर्यता (Reversibly) से जुड़ सकता है। हिमोग्लोबिन जब शरीर के ऊतकों से कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करता है, वह कार्बोक्सी हिमोग्लोबिन कहलाता है। कार्बोक्सी हिमोग्लोबिन वाला रक्त अशुद्ध होता है जो शिराओं से होकर फेफड़ों में श्वांस लेने की प्रक्रिया में हीमोग्लोबिन कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़कर शुद्ध ऑक्सीजन ग्रहण करता है। यह शुद्ध रक्त धमनियों द्वारा कोशिकाओं तक पहुंचता है। अशुद्ध रक्त का रंग नील लोहित या बैंगनी होता है। शिराओं की भित्तियां पतली होती हैं और ये त्वचा के ठीक नीचे होती हैं। इसीलिए ऊपर से शिराओं को देखना आसान होता है। अशुद्ध नील लोहित रंग के रक्त के कारण शिराएं हमें नीले रंग की दिखाई देती हैं। शिराओं की तुलना में धमनियों की भित्ति अधिक मोटी होती है और काफी गहराई में स्थित होती है। इस कारण लाल रक्त प्रवाहित होने वाली धमनी हमें दिखाई नहीं देती है।

Wednesday, February 4, 2015

टाईफाइड क्यों होता है ?

               
                             टाइफाइड एक तरह के जीवाणु से फैलता है। आयुर्विज्ञान की भाषा में इसे बैसिलस सेलमोनेला टायफोसा कहा जाता है। यह एक भयानक संक्रामक रोग है। बहुत पहले हजारों लोग इस महामारी से काल कलवित हो जाते थे, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान के विकास से इस पर काबू पा लिया गया है।
                             यह गंदे भोजन या गंदे पानी के साथ शरीर में प्रवेश करके खून तक पहुंच जाता है। यह खून को प्रभावित करके पूरी रक्त व्यवस्था को दूषित कर देता है। इस बीमारी में बुखार, खांसी, खाल का उधड़ना, तिल्ली का बढ़ जाना और श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी हो जाना आदि होता है। इस बीमारी में भूख भी कम लगती है और लगातार बुखार रहता है।
                               टाइफाइड के जीवाणु पकने से पहले भोजन सामग्री में भी वाहक द्वारा पंहुच सकते हैं। मक्खियां भी इन जीवाणुओं को इधर से उधर पहुंचाती हैं। टाइफाइड की बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी शरीर में ये जीवाणु बचे रह जाते हैं। टाइफाइड की जांच के लिए विडेल टेस्ट किया जाता है। इसमें खून की जांच की जाती है।