उत्तर - मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हमारा मस्तिष्क चेतन अवस्था में ही कार्य नहीं करता,बल्कि अवचेतन अवस्था में भी कार्य करता है। हमारी याददाश्त खो जाने पर मस्तिष्क सिर्फ वे बातें भूल जाता है, जो मस्तिष्क की चेतनावस्था में होती हैं, जैसे अपना नाम, अपना घर, कार्यस्थल इत्यादि। लेकिन उसे वे सब बातें ध्यान रहती हैं जो कि अवचेतन मस्तिष्क में मौजूद होती हैं, जैसे अपनी भाषा, पढ़ने-लिखने की क्षमता आदि। इसीलिए अपनी याददाश्त खो जाने पर भी आदमी को अपनी भाषा याद रहती है।
Sunday, September 13, 2015
प्रश्न - जब किसी आदमी की याददाश्त खो जाती है तो उसे अपनी भाषा कैसे याद रहती है ?
उत्तर - मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हमारा मस्तिष्क चेतन अवस्था में ही कार्य नहीं करता,बल्कि अवचेतन अवस्था में भी कार्य करता है। हमारी याददाश्त खो जाने पर मस्तिष्क सिर्फ वे बातें भूल जाता है, जो मस्तिष्क की चेतनावस्था में होती हैं, जैसे अपना नाम, अपना घर, कार्यस्थल इत्यादि। लेकिन उसे वे सब बातें ध्यान रहती हैं जो कि अवचेतन मस्तिष्क में मौजूद होती हैं, जैसे अपनी भाषा, पढ़ने-लिखने की क्षमता आदि। इसीलिए अपनी याददाश्त खो जाने पर भी आदमी को अपनी भाषा याद रहती है।
Saturday, August 22, 2015
हमारे वृक्कों एवं पित्ताशय में पथरी (stones) कैसे बन जाती है ?
शरीर के अंदर ठोस पदार्थों के छोटे-छोटे कठोर कणों का संग्रह पथरी (stones) कहलाता है। शरीर में निर्मित विशिष्ट द्रव पदार्थ जैसे मूत्र या पित्त में किसी अवयव की अत्याधिक मात्रा पथरी का निर्माण कर देती है। सामान्यत: पथरी दो अंगों में अधिक बनती है - 1. पित्ताशय (Gall bladder) में, 2. मूत्राशय (Urinary bladder) व वृक्क (Kidney) में।
वृक्कों व शेष मूत्र-तंत्र में पथरी बनने के अधिकांश मामलों का कोई भी निश्चित कारण ज्ञात नहीं है, फिर भी गर्म जलवायु में जल का कम सेवन तथा अधिकांश समय बिस्तर पर पड़े रहने को इसके लिए कुछ उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। वृक्क या गुर्दे की पथरी जिन्हें तकनीकी भाषा में केलकुलस (calculus) कहा जाता है, 70 फीसदी मामलों में कैल्शियम ऑक्जलेट तथा फास्फेट से बनी होती है। हरी पत्तेदार सब्जियों, कॉफ़ी आदि में ऑक्जेलिक अम्ल की अधिक मात्रा होती है। 20 प्रतिशत मामलों में गुर्दे की पथरी कैल्शियम, मैग्नीशियम व अमोनियम फास्फेट की बनी होती है। यह मूत्र जनन-तंत्र के संक्रमण से जुड़ी होती है।
पित्ताशय की पथरी मुख्यत: कोलेस्ट्राल की बनी होती है लेकिन इसमें पित्त वर्णक व कैल्शियम यौगिक जैसे अन्य पदार्थ भी पाए जा सकते हैं। पित्ताशय की पथरी बनने का प्रमुख कारण पित्त के रासायनिक संघटन में बदलाव आ जाना है। अधिक मोटापे के समय यकृत पित्त में अधिक कोलेस्ट्राल मुक्त करता है, यह पथरी बनने का एक कारण है। दूसरी ओर जब यकृत कोलेस्ट्राल को विलेय अवस्था में बनाए रखने में सक्षम प्रक्षालक (detergent) पदार्थों को पित्त में कम मात्रा में स्रावित करता है, तब भी पथरी बन जाती है। कभी-कभी जीवाणु (bacteria) भी कोलेस्ट्राल को ठोसीकृत कर पथरी निर्माण कर देते हैं।
वृक्कों व शेष मूत्र-तंत्र में पथरी बनने के अधिकांश मामलों का कोई भी निश्चित कारण ज्ञात नहीं है, फिर भी गर्म जलवायु में जल का कम सेवन तथा अधिकांश समय बिस्तर पर पड़े रहने को इसके लिए कुछ उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। वृक्क या गुर्दे की पथरी जिन्हें तकनीकी भाषा में केलकुलस (calculus) कहा जाता है, 70 फीसदी मामलों में कैल्शियम ऑक्जलेट तथा फास्फेट से बनी होती है। हरी पत्तेदार सब्जियों, कॉफ़ी आदि में ऑक्जेलिक अम्ल की अधिक मात्रा होती है। 20 प्रतिशत मामलों में गुर्दे की पथरी कैल्शियम, मैग्नीशियम व अमोनियम फास्फेट की बनी होती है। यह मूत्र जनन-तंत्र के संक्रमण से जुड़ी होती है।
पित्ताशय की पथरी मुख्यत: कोलेस्ट्राल की बनी होती है लेकिन इसमें पित्त वर्णक व कैल्शियम यौगिक जैसे अन्य पदार्थ भी पाए जा सकते हैं। पित्ताशय की पथरी बनने का प्रमुख कारण पित्त के रासायनिक संघटन में बदलाव आ जाना है। अधिक मोटापे के समय यकृत पित्त में अधिक कोलेस्ट्राल मुक्त करता है, यह पथरी बनने का एक कारण है। दूसरी ओर जब यकृत कोलेस्ट्राल को विलेय अवस्था में बनाए रखने में सक्षम प्रक्षालक (detergent) पदार्थों को पित्त में कम मात्रा में स्रावित करता है, तब भी पथरी बन जाती है। कभी-कभी जीवाणु (bacteria) भी कोलेस्ट्राल को ठोसीकृत कर पथरी निर्माण कर देते हैं।
Saturday, August 15, 2015
प्राणियों में श्वसन के लिए ऑक्सीजन ही क्यों आवश्यक है ?
सूक्ष्म तथा निम्न कोटि के जीवों में बिना ऑक्सीजन के ही ग्लूकोज का लैक्टिक अम्ल एवं एथिल एल्कोहल में विघटन हो जाता है। इससे प्राप्त हुई ऊर्जा का उपभोग जीव करते हैं।
बड़े जीवों में ऐसा संभव नहीं होता है क्योंकि उनकी कोशाओं में ऊर्जा प्राप्ति के लिए ऑक्सीकरण क्रिया द्वारा ग्लूकोज का कार्बन डाईऑक्साइड एवं जल में विघटन होता है। चूँकि ऑक्सीकरण क्रिया में ऑक्सीजन का काम होता है, इसलिए श्वसन में ऑक्सीजन की उपस्थिति अनिवार्य है।
बड़े जीवों में ऐसा संभव नहीं होता है क्योंकि उनकी कोशाओं में ऊर्जा प्राप्ति के लिए ऑक्सीकरण क्रिया द्वारा ग्लूकोज का कार्बन डाईऑक्साइड एवं जल में विघटन होता है। चूँकि ऑक्सीकरण क्रिया में ऑक्सीजन का काम होता है, इसलिए श्वसन में ऑक्सीजन की उपस्थिति अनिवार्य है।
Tuesday, August 4, 2015
रेगिस्तान में कुछ दूरी पर जल होने का भ्रम क्यों होता है ?
रेगिस्तान में जल होने का भ्रम पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण होता है। जब सूर्य की गर्मी से रेगिस्तान की रेत गर्म होती है तो उसके संपर्क में आने वाली वायु भी गर्म हो जाती है, परंतु इस वायु के ऊपर का तापमान क्रमश: कम होता जाता है। अत: वायु के नीचे की परतें अपेक्षाकृत विरल होती हैं और जब प्रकाश की किरणें पृथ्वी की ओर आती है तो इन्हें विरल परतों से होकर गुजरना पड़ता है, और प्रत्येक परत पर अपवर्तित किरण अभिलम्ब से दूर हटती जाती है। अत: प्रत्येक अगली परत पर आपतन कोण बढ़ता जाता है तथा किसी विशेष परत पर क्रांतिक कोण से बड़ा हो जाता है। तब इस परत पर किरण पूर्ण परावर्तित होकर ऊपर की ओर चलने लगती है। ऊपरी परतों के सघन होने के कारण ऊपर बढ़ने वाली किरणें अभिलम्ब की ओर झुकती जाती हैं। जब यह रेगिस्तान के यात्री की आँख में प्रवेश करती है, तो उसे पृथ्वी के नीचे से आती हुई प्रतीत होती है तथा यात्री को पेड़ का उल्टा प्रतिबिम्ब दिखायी देता है। इसी से रेगिस्तान में जल होने का भ्रम हो जाता है।
Monday, July 20, 2015
जीवित व्यक्ति पानी में डूब जाता है, जबकि मृतक व्यक्ति का शव पानी पर तैरता है। ऐसा क्यों ?
उत्तर - आर्कमिडीज के सिद्धांत के अनुसार जब किसी ठोस को किसी द्रव में डुबाते हैं, तो उसके भार में एक प्रत्यक्ष कमी आ जाती है। यह कमी ठोस द्वारा हटाये गए द्रव के भार के बराबर होती है। यदि वस्तु द्वारा हटाये गए द्रव का भार, वस्तु के भार के बराबर होता है, तो वस्तु द्रव में तैरती है। हटाए गए द्रव का भार, वस्तु के भार से कम होने पर, वस्तु पानी में डूब जाती है। इसे इस प्रकार भी समझा जा सकता है, यदि ठोस का घनत्व द्रव के घनत्व से कम है, तो ठोस द्रव में तैरेगा।
Tuesday, July 7, 2015
चोट लगने पर सूजन क्यों आ जाती है ?
चोट लगने पर चोट वाले स्थान पर प्रतिरक्षी क्रियाएँ तेजी से होने लगती हैं और उस स्थान पर लसिका (Lymph) के इकट्ठा होने के कारण उस स्थान पर सूजन आ जाती है। प्रतीरक्षियों के कारण वह स्थान लाल हो जाता है तथा वहां खुजली भी होने लगती है।
Sunday, July 5, 2015
अंडा उबालने पर ठोस क्यों हो जाता है ?
अंडे की जर्दी में वसा अधिक मात्रा में पायी जाती है, जो गर्म होने पर भी नर्म बनी रहती है। अंडे का आंतरिक भाग एल्ब्युमिन नामक प्रोटीन का बना होता है। यह प्रोटीन पानी में घुलनशील है। थोड़ा गर्म करने से यह थक्काकरण की क्रिया से जम जाता है। कुछ और अधिक ऊंचे ताप एल्ब्युमिन, रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप, विखंडित होकर ठोस रूप धारण कर लेता है। यही कारण है कि अंडा गर्म करने पर ठोस रूप धारण कर लेता है।
Sunday, June 28, 2015
लोग गंजे क्यों होते हैं ?
उत्तर - मनुष्य में गंजापन विकिरण तथा थायरॉयड ग्रन्थि की अनियमितताओं के कारण भी हो सकता है और आनुवांशिक भी। आनुवांशिक गंजापन एक ऑटोसोमल एलील जीन जोड़ी (Bb) पर निर्भर करता है। होमोजाइगस प्रबल जीन रूप (BB) होने पर गंजापन पुरुषों तथा स्त्रियों दोनों में विकसित होता है लेकिन हिटरोजाइगस (Bb) होने पर ये स्त्रियों में न होकर केवल पुरुषों में विकसित होता है।
Thursday, June 25, 2015
पशुओं के बाल उम्र बढ़ने पर सफेद क्यों नहीं होते ?
बालों के काले रंग के लिए मुख्यत: मिलेनिन नामक पदार्थ उत्तरदायी होता है। पशुओं में मिलेनिन और इसे उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं की मात्रा काफी अधिक होती है। अत: पशुओं में बाल जन्म के समय वाले ही रंग के बने रहते हैं। मिलेनिन की अधिक मात्रा ही बालों को सफेद होने से रोकती है।
Tuesday, June 23, 2015
करेंट लगने से मनुष्य की मृत्यु क्यों हो जाती है ?
हम जानते हैं कि मनुष्य का शरीर विद्युत सुचालक होता है। विद्युत सुचालक तथा सजीव होने के कारण मनुष्य के शरीर में (निश्चित गति) से इलेक्ट्रानों का प्रवाह होता है। जब मनुष्य को करेंट लगता है तो इन इलेक्ट्रानों की गति तीव्र हो जाती है और मनुष्य का तंत्रिका तंत्र कार्य करना बन्द कर देता है जिससे जैविक क्रियाएं ठप हो जाती है और मनुष्य की मृत्यु हो जाती है।
Tuesday, June 16, 2015
वायुमंडल में ताप संतुलन (Heat Balance of the Atmosphere) क्या है ?
पृथ्वी को अधिकांश ऊष्मा (Heat) सूर्य से विकीर्ण ताप द्वारा प्राप्त होती है। सूर्य से विकीर्ण ताप लघु तरंगों ( Short Waves) द्वारा पृथ्वी को प्राप्त होता है। वायुमंडल सूर्य से विकीर्ण ऊर्जा (Energy) का केवल 14 प्रतिशत प्रत्यक्ष रूप में प्राप्त करता है। वायुमंडल को अधिकांश ताप की प्राप्ति (अप्रत्यक्ष रूप से), पृथ्वी से विकीर्ण ऊर्जा द्वारा प्राप्त होती है, जो कि दीर्घ तरंगों (Long Waves) के रूप में होती है। इस प्रकार पृथ्वी एवं वायुमंडल निरंतर सूर्य से ऊष्मा प्राप्त करते हैं। लेकिन यह उल्लेखनीय है कि फिर भी पृथ्वी तथा वायुमंडल का ऊष्मा भंडार बढ़ता या घटता नहीं, बल्कि सदैव संतुलित रहता है कि इसका तात्पर्य है कि पृथ्वी तथा वायुमंडल जितना ताप प्राप्त करते हैं, उतना ही शून्य में लौट जाता है।
Tuesday, June 9, 2015
कुछ जानवरों की आँखें रात में क्यों चमकती हैं ?
जिन जानवरों की आँखें रात में चमकते हैं, उनके आँखों में रक्तपटल (Choroid) में दृष्टि पटल (Retina) के ठीक बाहर की ओर सिल्वर के समान चमकते हुए संयोगी ऊत्तक अथवा अन्य रंगीन पदार्थ के कणों की एक विशेष पतली पर्त होती है जिसे टेपीटम लूसीडम कहते हैं। यह पर्त परावर्ती (Reflecting) होने के कारण इस पर पड़ता है तो परावर्तित हो जाता है जिसके कारण से इन जानवरों की आँखें चमकती हैं एवं इन्हें कम रोशनी में भी दिखाई पड़ता है।
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Tuesday, May 26, 2015
तारों की आभासी गति का क्या कारण है ?
यदि हम आसमान में तारों को अधिक समय तक देखें तो हम पाते हैं कि तारे पूर्व में उदय होकर वृत्तीय पथ पर चलते हुए पश्चिम में अस्त हो जाते हैं जबकि वास्तव में वे आकाश में स्थिर होते हैं। इस गति में उनकी सापेक्षिक स्थितियां नहीं बदलती है। इससे ऐसा लगता है कि तारे पृथ्वी के परित: परिक्रमा कर रहे हैं अथवा खगोलीय गोला पृथ्वी के परित: घूर्णन कर रहा है। आसमान में पूर्व से पश्चिम की ओर गति करते हुए प्रतीत होते हैं। ध्रुव तारा पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के सीधे ऊपर स्थित होता है, अत: यह पृथ्वी की घूर्णन अक्ष की सीध में होता है जिसके कारण वह आसमान में स्थिर दिखाई देता है।
Wednesday, May 13, 2015
पेट के रोगी का एक्स-रे चित्र लेने से पहले उसे बेरियम सल्फेट का घोल क्यों पिलाया जाता है ?
असल में एक्स-रे किरणें शरीर के उन्हीं भागों को दर्शाती हैं जिनमें से होकर वे गुजर नहीं सकती। जैसे कि हड्डियाँ। अत: किसी रोगी की आँतों से संबंधित कोई रोग हो जैसे अल्सर,हर्निया या फिर ट्यूमर तो साधारण एक्स-रे मात्र से ये सब धुंधली नजर आएगी। इस तरह के धुंधलेपन को दूर करने के लिए रोगी की एक्स-रे से पहले बेरियम युक्त आहार दिया जाता है। बेरियम आहार में बेरियम सल्फेट की सफेद चाक जैसे पदार्थ की एक खुराक होती है। जो एक्स-रे को रोकने का सामर्थ्य रखती है। इस तरह से यह बेरियम सल्फेट डाक्टरों को आहार नलिका का सही व सूक्ष्म निरिक्षण करने में मददगार सिद्ध होती है।
Saturday, May 2, 2015
पृथ्वी का निर्माण किस प्रकार हुआ ?
पृथ्वी उत्पत्ति ग्रहाणुओं के एक ठंडे समूह से हुई। ये ग्रहाणुओं आंतरिक ग्रहों के क्षेत्र में मुख्यत: सिलिकन, लोहा, मैग्नीशियम के यौगिकों के साथ सूक्ष्म मात्रा में अन्य तत्वों के मिलने से बने थे। जैसे-जैसे और अधिक ग्रहाणु पृथ्वी से टकराते गये वैसे-वैसे वे इससे जुड़ते गये। इन ग्रहाणुओं की गतिज ऊर्जा टक्करों के कारण उष्मीय ऊर्जा में बदलती गई। इससे इसका ताप भी बढ़ता गया। इसके अतिरिक्त पृथ्वी के संपीडन एवं रेडियोएक्टिव विघटन के कारण यह ग्रह और गर्म होता रहा तथा अपनी उत्पत्ति के लगभग 80 करोड़ वर्ष बाद पिघल गया। इस ग्रह ने गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव की सहायता से सहायता से स्वयं को व्यवस्थित करना प्रारंभ कर दिया। लोहा पिघलकर इसके केंद्र की ओर गिरने लगा तथा हल्के पदार्थ पृथ्वी के सतह पर आ गये। इससे भूपर्पटी का निर्माण हुआ। गुरुत्वाकर्षण के कारण केंद्र में पहुंचे लोहे से क्रोड का निर्माण हुआ। बीच का भाग प्रवार बना। विभेदन के फलस्वरूप वायुमंडल, सागर, महासागरों तथा महाद्वीपों का निर्माण हुआ। इस प्रकार पृथ्वी की उत्पत्ति हुई।
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