Saturday, October 10, 2015

किसी निश्चित ताप की गर्म हवा मानव शरीर को जला नहीं पाती है, लेकिन उसी ताप का पानी मनुष्य के शरीर को जला क्यों देता है ?


                                    उत्तर - पानी की अपेक्षा हवा की विशिष्ट ऊष्मा बहुत कम होती है। अत: किसी निश्चित ताप पर हवा के किसी द्रव्यमान में ऊष्मा की मात्रा, उसी ताप पर उसी द्रव्यमान के पानी में ऊष्मा की मात्रा से अधिक होती है। जब मनुष्य इस गर्म हवा के संपर्क में आता है, तब उसके शरीर को उतनी ऊष्मा नहीं मिल पाती है, जिससे कि उसका शरीर जल जाए। दूसरी ओर, उसी ताप के जल के संपर्क में आने पर, उसे अपेक्षाकृत अधिक ऊष्मा मिलती है और शरीर जल जाता है।

वायुमंडल में ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन आदि बहुत सी गैसें हैं, लेकिन हम इनमें से ऑक्सीजन किस तरह से ग्रहण कर लेते हैं ?



                 उत्तर - वायुमंडल में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि बहुत सारी गैसें होती है। जब हम अपने फेफड़ों के द्वारा सांस लेते हैं तो वायुमंडल में उपस्थित गैसें हमारे फेफड़ों में भर जाती है। इसी समय फेफड़ों की रक्त-नलिकाओं में उपस्थित हिमोग्लोबिन फेफड़ों में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके ऑक्सी हीमोग्लोबिन (oxi-heamoglobin) का निर्माण करती है जो अशुद्ध रक्त को शुद्ध रक्त में परिवर्तित करती है।
फेफड़ों में उपस्थित अन्य गैसें बाहर निकाल दी जाती हैं। इस प्रकार वायुमंडल में उपस्थित ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि गैसों में से केवल ऑक्सीजन ही ग्रहण करते हैं।

Tuesday, September 15, 2015

व्यक्ति चाहे कितना ही काला क्यों न हो उसकी हथेलियां और तलवे अपेक्षाकृत सफेद क्यों होते हैं?


                              उत्तर - हमारी त्वचा का रंग एक गहरे भूरे रंजक द्रव्य 'मेलानिन' के कारण होता है। जिसका निर्माण त्वचा की ' मेलनोसाइट' नामक कोशिकाएं करती हैं। मेलानोसाइट ही कोशिकाओं को मेलानिन उत्पन्न करने के लिए प्रेरित करती हैं, जिसके कारण हमारी त्वचा का रंग काला होता है। हमारी हथेलियों एवं तलवों में मेलानोसाइट कोशिकाएं काफी कम होती हैं, जिसके कारण वहां मेलानिन पैदा नहीं होती और हमारी हथेलियां और तलवे हमारी त्वचा की तुलना में अपेक्षाकृत धवल होते हैं। उल्लेखनीय है कि मेलानिन की मात्रा अलग-अलग लोगों में अलग-अलग होती है, जबकि हथेलियों एवं तलवों में लगभग सभी व्यक्तियों में इसकी मात्रा एक समान (नगण्य) होती है।

Sunday, September 13, 2015

प्रश्न - जब किसी आदमी की याददाश्त खो जाती है तो उसे अपनी भाषा कैसे याद रहती है ?



             उत्तर - मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हमारा मस्तिष्क चेतन अवस्था में ही कार्य नहीं करता,बल्कि अवचेतन अवस्था में भी कार्य करता है। हमारी याददाश्त खो जाने पर मस्तिष्क सिर्फ वे बातें भूल जाता है, जो मस्तिष्क की चेतनावस्था में होती हैं, जैसे अपना नाम, अपना घर, कार्यस्थल इत्यादि। लेकिन उसे वे सब बातें ध्यान रहती हैं जो कि अवचेतन मस्तिष्क में मौजूद होती हैं, जैसे अपनी भाषा, पढ़ने-लिखने की क्षमता आदि। इसीलिए अपनी याददाश्त खो जाने पर भी आदमी को अपनी भाषा याद रहती है।

Saturday, August 22, 2015

हमारे वृक्कों एवं पित्ताशय में पथरी (stones) कैसे बन जाती है ?


                                      शरीर के अंदर ठोस पदार्थों के छोटे-छोटे कठोर कणों का संग्रह पथरी (stones) कहलाता है। शरीर में निर्मित विशिष्ट द्रव पदार्थ जैसे मूत्र या पित्त में किसी अवयव की अत्याधिक मात्रा पथरी का निर्माण कर देती है। सामान्यत: पथरी दो अंगों में अधिक बनती है - 1. पित्ताशय (Gall bladder) में, 2. मूत्राशय (Urinary bladder) व वृक्क (Kidney) में।
                                     वृक्कों व शेष मूत्र-तंत्र में पथरी बनने के अधिकांश मामलों का कोई भी निश्चित कारण ज्ञात नहीं है, फिर भी गर्म जलवायु में जल का कम सेवन तथा अधिकांश समय बिस्तर पर पड़े रहने को इसके लिए कुछ उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। वृक्क या गुर्दे की पथरी जिन्हें तकनीकी भाषा में केलकुलस (calculus) कहा जाता है, 70 फीसदी मामलों में कैल्शियम ऑक्जलेट तथा फास्फेट से बनी होती है। हरी पत्तेदार सब्जियों, कॉफ़ी आदि में ऑक्जेलिक अम्ल की अधिक मात्रा होती है। 20 प्रतिशत मामलों में गुर्दे की पथरी कैल्शियम, मैग्नीशियम व अमोनियम फास्फेट की बनी होती है। यह मूत्र जनन-तंत्र के संक्रमण से जुड़ी होती है।
                                      पित्ताशय की पथरी मुख्यत: कोलेस्ट्राल की बनी होती है लेकिन इसमें पित्त वर्णक व कैल्शियम यौगिक जैसे अन्य पदार्थ भी पाए जा सकते हैं। पित्ताशय की पथरी बनने का प्रमुख कारण पित्त के रासायनिक संघटन में बदलाव आ जाना है। अधिक मोटापे के समय यकृत पित्त में अधिक कोलेस्ट्राल मुक्त करता है, यह पथरी बनने का एक कारण है। दूसरी ओर जब यकृत कोलेस्ट्राल को विलेय अवस्था में बनाए रखने में सक्षम प्रक्षालक (detergent) पदार्थों को पित्त में कम मात्रा में स्रावित करता है, तब भी पथरी बन जाती है। कभी-कभी जीवाणु (bacteria) भी कोलेस्ट्राल को ठोसीकृत कर पथरी निर्माण कर देते हैं।




Saturday, August 15, 2015

प्राणियों में श्वसन के लिए ऑक्सीजन ही क्यों आवश्यक है ?


                            सूक्ष्म तथा निम्न कोटि के जीवों में बिना ऑक्सीजन के ही ग्लूकोज का लैक्टिक अम्ल एवं एथिल एल्कोहल में विघटन हो जाता है। इससे प्राप्त हुई ऊर्जा का उपभोग जीव करते हैं।
                            बड़े जीवों में ऐसा संभव नहीं होता है क्योंकि उनकी कोशाओं में ऊर्जा प्राप्ति के लिए ऑक्सीकरण क्रिया द्वारा ग्लूकोज का कार्बन डाईऑक्साइड एवं जल में विघटन होता है। चूँकि ऑक्सीकरण क्रिया में ऑक्सीजन का काम होता है, इसलिए श्वसन में ऑक्सीजन की उपस्थिति अनिवार्य है।

Tuesday, August 4, 2015

रेगिस्तान में कुछ दूरी पर जल होने का भ्रम क्यों होता है ?


                               रेगिस्तान में जल होने का भ्रम पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण होता है। जब सूर्य की गर्मी से रेगिस्तान की रेत गर्म होती है तो उसके संपर्क में आने वाली वायु भी गर्म हो जाती है, परंतु इस वायु के ऊपर का तापमान क्रमश: कम होता जाता है। अत: वायु के नीचे की परतें अपेक्षाकृत विरल होती हैं और जब प्रकाश की किरणें पृथ्वी की ओर आती है तो इन्हें विरल परतों से होकर गुजरना पड़ता है, और प्रत्येक परत पर अपवर्तित किरण अभिलम्ब से दूर हटती जाती है। अत: प्रत्येक अगली परत पर आपतन कोण बढ़ता जाता है तथा किसी विशेष परत पर क्रांतिक कोण से बड़ा हो जाता है। तब इस परत पर किरण पूर्ण परावर्तित होकर ऊपर की ओर चलने लगती है। ऊपरी परतों के सघन होने के कारण ऊपर बढ़ने वाली किरणें अभिलम्ब की ओर झुकती जाती हैं। जब यह                                  रेगिस्तान के यात्री की आँख में प्रवेश करती है, तो उसे पृथ्वी के नीचे से आती हुई प्रतीत होती है तथा यात्री को पेड़ का उल्टा प्रतिबिम्ब दिखायी देता है। इसी से रेगिस्तान में जल होने का भ्रम हो जाता है।

Monday, July 20, 2015

जीवित व्यक्ति पानी में डूब जाता है, जबकि मृतक व्यक्ति का शव पानी पर तैरता है। ऐसा क्यों ?


उत्तर - आर्कमिडीज के सिद्धांत के अनुसार जब किसी ठोस को किसी द्रव में डुबाते हैं, तो उसके भार में एक प्रत्यक्ष कमी आ जाती है। यह कमी ठोस द्वारा हटाये गए द्रव के भार के बराबर होती है। यदि वस्तु द्वारा हटाये गए द्रव का भार, वस्तु के भार के बराबर होता है, तो वस्तु द्रव में तैरती है। हटाए गए द्रव का भार, वस्तु के भार से कम होने पर, वस्तु पानी में डूब जाती है। इसे इस प्रकार भी समझा जा सकता है, यदि ठोस का घनत्व द्रव के घनत्व से कम है, तो ठोस द्रव में तैरेगा।


Tuesday, July 7, 2015

चोट लगने पर सूजन क्यों आ जाती है ?


                                    चोट लगने पर चोट वाले स्थान पर प्रतिरक्षी क्रियाएँ तेजी से होने लगती हैं और उस स्थान पर लसिका (Lymph) के इकट्ठा होने के कारण उस स्थान पर सूजन आ जाती है। प्रतीरक्षियों के कारण वह स्थान लाल हो जाता है तथा वहां खुजली भी होने लगती है।

Sunday, July 5, 2015

अंडा उबालने पर ठोस क्यों हो जाता है ?


                                   अंडे की जर्दी में वसा अधिक मात्रा में पायी जाती है, जो गर्म होने पर भी नर्म बनी रहती है। अंडे का आंतरिक भाग एल्ब्युमिन नामक प्रोटीन का बना होता है। यह प्रोटीन पानी में घुलनशील है। थोड़ा गर्म करने से यह थक्काकरण की क्रिया से जम जाता है। कुछ और अधिक ऊंचे ताप एल्ब्युमिन, रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप, विखंडित होकर ठोस रूप धारण कर लेता है। यही कारण है कि अंडा गर्म करने पर ठोस रूप धारण कर लेता है।

Sunday, June 28, 2015

लोग गंजे क्यों होते हैं ?


उत्तर -  
मनुष्य में गंजापन विकिरण तथा थायरॉयड ग्रन्थि की अनियमितताओं के कारण भी हो सकता है और आनुवांशिक भी। आनुवांशिक गंजापन एक ऑटोसोमल एलील जीन जोड़ी (Bb) पर निर्भर करता है। होमोजाइगस प्रबल जीन रूप (BB) होने पर गंजापन पुरुषों तथा स्त्रियों दोनों में विकसित होता है लेकिन हिटरोजाइगस (Bb) होने पर ये स्त्रियों में न होकर केवल पुरुषों में विकसित होता है।

Thursday, June 25, 2015

पशुओं के बाल उम्र बढ़ने पर सफेद क्यों नहीं होते ?


                               बालों के काले रंग के लिए मुख्यत: मिलेनिन नामक पदार्थ उत्तरदायी होता है। पशुओं में मिलेनिन और इसे उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं की मात्रा काफी अधिक होती है। अत: पशुओं में बाल जन्म के समय वाले ही रंग के बने रहते हैं। मिलेनिन की अधिक मात्रा ही बालों को सफेद होने से रोकती है।

Tuesday, June 23, 2015

करेंट लगने से मनुष्य की मृत्यु क्यों हो जाती है ?


हम जानते हैं कि मनुष्य का शरीर विद्युत सुचालक होता है। विद्युत सुचालक तथा सजीव होने के कारण मनुष्य के शरीर में (निश्चित गति) से इलेक्ट्रानों का प्रवाह होता है। जब मनुष्य को करेंट लगता है तो इन इलेक्ट्रानों की गति तीव्र हो जाती है और मनुष्य का तंत्रिका तंत्र कार्य करना बन्द कर देता है जिससे जैविक क्रियाएं ठप हो जाती है और मनुष्य की मृत्यु हो जाती है।

Tuesday, June 16, 2015

वायुमंडल में ताप संतुलन (Heat Balance of the Atmosphere) क्या है ?


                      पृथ्वी को अधिकांश ऊष्मा (Heat) सूर्य से विकीर्ण ताप द्वारा प्राप्त होती है। सूर्य से विकीर्ण ताप लघु तरंगों ( Short Waves) द्वारा पृथ्वी को प्राप्त होता है। वायुमंडल सूर्य से विकीर्ण ऊर्जा (Energy) का केवल 14 प्रतिशत प्रत्यक्ष रूप में प्राप्त करता है। वायुमंडल को अधिकांश ताप की प्राप्ति (अप्रत्यक्ष रूप से), पृथ्वी से विकीर्ण ऊर्जा द्वारा प्राप्त होती है, जो कि दीर्घ तरंगों (Long Waves) के रूप में होती है। इस प्रकार पृथ्वी एवं वायुमंडल निरंतर सूर्य से ऊष्मा प्राप्त करते हैं। लेकिन यह उल्लेखनीय है कि फिर भी पृथ्वी तथा वायुमंडल का ऊष्मा भंडार बढ़ता या घटता नहीं, बल्कि सदैव संतुलित रहता है कि इसका तात्पर्य है कि पृथ्वी तथा वायुमंडल जितना ताप प्राप्त करते हैं, उतना ही शून्य में लौट जाता है।

Tuesday, June 9, 2015

कुछ जानवरों की आँखें रात में क्यों चमकती हैं ?

                                     
                                   जिन जानवरों की आँखें रात में चमकते हैं, उनके आँखों में रक्तपटल (Choroid) में दृष्टि पटल (Retina) के ठीक बाहर की ओर सिल्वर के समान चमकते हुए संयोगी ऊत्तक अथवा अन्य रंगीन पदार्थ के कणों की एक विशेष पतली पर्त होती है जिसे टेपीटम लूसीडम कहते हैं। यह पर्त परावर्ती (Reflecting) होने के कारण इस पर पड़ता है तो परावर्तित हो जाता है जिसके कारण से इन जानवरों की आँखें चमकती हैं एवं इन्हें कम रोशनी में भी दिखाई पड़ता है।