विज्ञान


वायुमंडल में ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन आदि बहुत सी गैसें हैं, लेकिन हम इनमें से ऑक्सीजन किस तरह से ग्रहण कर लेते हैं ?



                 उत्तर - वायुमंडल में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि बहुत सारी गैसें होती है। जब हम अपने फेफड़ों के द्वारा सांस लेते हैं तो वायुमंडल में उपस्थित गैसें हमारे फेफड़ों में भर जाती है। इसी समय फेफड़ों की रक्त-नलिकाओं में उपस्थित हिमोग्लोबिन फेफड़ों में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके ऑक्सी हीमोग्लोबिन (oxi-heamoglobin) का निर्माण करती है जो अशुद्ध रक्त को शुद्ध रक्त में परिवर्तित करती है।
फेफड़ों में उपस्थित अन्य गैसें बाहर निकाल दी जाती हैं। इस प्रकार वायुमंडल में उपस्थित ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि गैसों में से केवल ऑक्सीजन ही ग्रहण करते हैं।
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रेगिस्तान में कुछ दूरी पर जल होने का भ्रम क्यों होता है ?

                                  
                                   रेगिस्तान में जल होने का भ्रम पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण होता है। जब सूर्य की गर्मी से रेगिस्तान की रेत गर्म होती है तो उसके संपर्क में आने वाली वायु भी गर्म हो जाती है, परंतु इस वायु के ऊपर का तापमान क्रमश: कम होता जाता है। अत: वायु के नीचे की परतें अपेक्षाकृत विरल होती हैं और जब प्रकाश की किरणें पृथ्वी की ओर आती है तो इन्हें विरल परतों से होकर गुजरना पड़ता है, और प्रत्येक परत पर अपवर्तित किरण अभिलम्ब से दूर हटती जाती है। अत: प्रत्येक अगली परत पर आपतन कोण बढ़ता जाता है तथा किसी विशेष परत पर क्रांतिक कोण से बड़ा हो जाता है। तब इस परत पर किरण पूर्ण परावर्तित होकर ऊपर की ओर चलने लगती है। ऊपरी परतों के सघन होने के कारण ऊपर बढ़ने वाली किरणें अभिलम्ब की ओर झुकती जाती हैं। जब यह रेगिस्तान के यात्री की आँख में प्रवेश करती है, तो उसे पृथ्वी के नीचे से आती हुई प्रतीत होती है तथा यात्री को पेड़ का उल्टा प्रतिबिम्ब दिखायी देता है। इसी से रेगिस्तान में जल होने का भ्रम हो जाता है।
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वायुमंडल में ताप संतुलन (Heat Balance of the Atmosphere) क्या है ?
                                       पृथ्वी को अधिकांश ऊष्मा (Heat) सूर्य से विकीर्ण ताप द्वारा प्राप्त होती है। सूर्य से विकीर्ण ताप लघु तरंगों ( Short Waves) द्वारा पृथ्वी को प्राप्त होता है। वायुमंडल सूर्य से विकीर्ण ऊर्जा (Energy) का केवल 14 प्रतिशत प्रत्यक्ष रूप में प्राप्त करता है। वायुमंडल को अधिकांश ताप की प्राप्ति (अप्रत्यक्ष रूप से), पृथ्वी से विकीर्ण ऊर्जा द्वारा प्राप्त होती है, जो कि दीर्घ तरंगों (Long Waves) के रूप में होती है। इस प्रकार पृथ्वी एवं वायुमंडल निरंतर सूर्य से ऊष्मा प्राप्त करते हैं। लेकिन यह उल्लेखनीय है कि फिर भी पृथ्वी तथा वायुमंडल का ऊष्मा भंडार बढ़ता या घटता नहीं, बल्कि सदैव संतुलित रहता है कि इसका तात्पर्य है कि पृथ्वी तथा वायुमंडल जितना ताप प्राप्त करते हैं, उतना ही शून्य में लौट जाता है।
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विज्ञान प्रश्न :- रेडियो धर्मिता क्या है ?

उत्तर - कुछ पदार्थ जैसे यूरेनियम,रेडियम आदि स्वत: प्रकार की बेधि किरणें उत्सर्जित करते हैं. ऐसे पदार्थों को रेडियो धर्मी पदार्थ कहते हैं और पदार्थों का स्वत: बेधि किरणें उत्सर्जित करने का गुण 'रेडियो धर्मिता' कहलाता है. ' रेडियो धर्मिता परमाणु नाभिक का गुण है. रेडियो धर्मिता तत्वों के नाभिक अस्थायी होते हैं. उनमें स्वत: विघटन का गुण होता है। परमाणु नाभिक के स्वत: विघटन को रेडियो- धर्मी विघटन कहते हैं. रेडियो एक्टिव या रेडियो धर्मी विघटन में परमाणु नाभिकों में बेधी किरणें उत्सर्जित होती हैं. ये किरणें रेडियो धर्मी किरणें कहलाती हैं.

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प्रश्न- मन्दिरों,गिरिजाघरों एवं कालेजों में घंटे बड़े क्यों लगाये जाते हैं ?

उत्तर - ध्वनी स्रोत का आकार जितना बड़ा होता है,उतनी ही ऊर्जा माध्यम में संचरित होती है। अत : अधिक प्रबल ध्वनी सुनाई देती है.
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Que. - Why vomitting occurs during pregnancy ?
प्रश्न - गर्भावस्था के दौरान उल्टी क्यों होती है ? 

Ans.- During pregnency placenta produces certain toxins which need to be expelled out and this requirement is fulfilled by vomitting. Even mother's stomach may also produce some.In earlier times drugs were given to stop vomitting as a result,the toxins accumulated and cut the parts of foetus,a condition called phocomelia. Now a days this does not happen due to more advanced drugs which effect (neutralise) the toxins. This is why vomitting occurs during pregnency.
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प्रश्न - एंजियोग्राफी क्या है?


उत्तर- हृदय रोग के परिक्षण की वह प्रक्रिया है, जिसमें दिल की धमनियों में एक विशेष प्रकार की दवा पहुंचाकर फोटो ली जाती है, जिससे यह पता लग सके कि उसमें अवरोध (ब्लोकेज) कहां पर है। इसके अलावा ह्रदय के विभिन्न हिस्सों में भी दवा पहुंचाकर उनकी सही स्थिति जानी जा सकती है।
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विज्ञान प्रश्न- क्यों नहीं होती है अपने हाथ से गुदगुदी ?

उत्तर- अगर गलती से किसी व्यक्ति का हाथ हमें अनजाने में छू जाए, तो हमें गुदगुदी होने लगती है। कुछ लोग तो गुदगुदी के इशारे मात्र से लोटपोट हो जाते हैं। इसके विपरीत यदि हम खुद अपने शरीर को गुदगुदाते हैं, तो किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं होती है।
                                हमारे दिमाग में कुछ इस तरह से प्रोग्राम होता है कि उसमें बाहरी संवेग और आंतरिक संवेगों को अलग करने में महारत हासिल होती है। दिमाग सबसे पहले उन संकेतों की अनदेखी करता है जो आंतरिक होते हैं, यानी जो व्यक्ति स्वयं अपने शरीर पर करता है। जब भी कोई व्यक्ति हमें गुदगुदाता है तो हंसी उसके कारण होने वाले आकस्मिक भय का ही रूप होती है। जब हम स्वयं खुद को गुदगुदाते हैं, तो हमें किसी प्रकार का भय नहीं रह जाता है।
                                  स्वयं को गुदगुदाने पर यह प्रतिक्रिया दिमाग के जिस हिस्से के कारण नहीं हो पाती है, उसे सेरेबेलम कहते हैं और यह दिमाग के पिछले हिस्से में स्थित होता है। यह दिमाग के अन्य हिस्सों को मिलने वाले संवेदात्मक संकेतों को नियंत्रित करने का काम करता है।

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विज्ञान प्रश्न - क्यों टूटते हैं तारे ?
उत्तर- आपने रात में तारे टूटते जरूर देखा होगा और फिर आंखें बंद कर कोई मुराद भी मांगी होगी। दरअसल आसमान से नीचे गिरती हुई चमकदार चीज तारा नहीं होकर, उल्काएं होती हैं।
                                 ये उल्काएं सुई की नोक से लेकर कई किलो वजनी होती हैं। इन्हें बिना किसी उपकरण की मदद से भी अंधेरी रात में देखा जा सकता है। जब इन उल्काओं की सतह और वायु के बीच का घर्षण ऊर्जा उत्पादित करता है, तब ये उल्काएं पृथ्वी की तरफ बढ़ने लगती है और इस ऊर्जा और पृथ्वी के वातावरण के कारण छोटे आकार की उल्काएं जलने लगती हैं। इस कारण तेज रोशनी दिखती है और लगता है जैसे कोई चमकदार तारा आसमान से टूटकर जमीन की तरफ बढ़ रहा है।
                                खगोल शास्त्रियों ने पाया कि उल्काएं समूह में ही रहती हैं। जब छोटी उल्काएं तारे की तरह टूट कर गिरती नजर आती हैं, तब बड़ी उल्काएं भी पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करती हैं। ये बड़ी उल्काएं जब पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वाकर्षण के कारण आ गिरती हैं, तब उन्हें उल्कापिंड कहा जाता है। बहुत सारे उल्कापिंड बिना नष्ट हुए पृथ्वी पर एक साथ गिरते हैं, तो उसे उल्कापात कहते हैं।

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प्रश्न - मधुमक्खियां शहद कैसे बनाती हैं ? 
उत्तर - शहद की मक्खियों की भी बस्तियां होती हैं। इनकी एक बस्ती में 60 हजार तक मक्खियां हो सकती हैं। मक्खियों के कई काम हैं। शुरू में ये छत्तों की सफाई और पॉलिश करने का काम करती हैं। कुछ दिनों बाद ये अंडों से निकले बच्चों का पालन-पोषण करती हैं और फिर फूलों के पराग से शहद जुटाने के लिए जाती हैं।
                              क्या आप जानते हैं कि मक्खियां फूलों के रस को शहद में कैसे बदल देती हैं। शहद इन मक्खियों का भोजन होता है, अत: शहद बनाने का काम अपनी बस्तियों की मक्खियों के लिए भोजन जुटाने का काम है। शहद जुटाने के लिए ये मक्खियां फूलों पर जाती हैं। फूलों में पुष्प रस होता है, जिसे ये मक्खियां चूस कर अपनी शहद की थैली में जमा कर छत्ते तक जाती हैं। 
                              शहद की  थैली मक्खी के पेट के पास होती है। पेट पर इस थैली को अलग करने के लिए बीच में एक वाल्व होता है। पुष्प रस (नेक्टर) में उपस्थित चीनी में एक रासायनिक परिवर्तन होता है। नेक्टर में जो पानी होता है, वह छत्ते से वाष्पीकरण द्वारा उड़ जाता है। इसके बाद यह शहद छत्ते में बहुत समय तक रखा जा सकता है।
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प्रश्न - ठंड के दिनों में नारियल का तेल कैसे जम जाता है, जबकि सरसों का तेल क्यों नहीं जमता ?
उत्तर - ठण्ड के दिनों में नारियल का तेल जम जाता है, जबकि सरसों का तेल नहीं जमता। यह उस वसा अम्ल की प्रकृति द्वारा निर्धारित होता है, जिससे वसा का अणु बना है। कुछ वसा अम्लों के अणुओं में एक या अधिक द्वि-आबंध होते हैं। इनको असंतृप्त वसा कहते हैं। इन वसाओं का द्रवनांक कम होते हैं। सरसों का तेल भी इसी श्रेणी में आता है। अत: इसका द्रवनांक भी कम होता है। जबकि नारियल का तेल संतृप्त वसा है। अत: अधिक स्थायी है। अधिक स्थायी होने की प्रवृत्ति के कारण ही नारियल का तेल जम जाता है। जबकि सरसों का तेल कम द्रवनांक होने के कारण नहीं जमता।
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जब सोडा वाटर की बोतल को खोलते हैं, तो तेजी से झाग क्यों उत्पन्न होते हैं ?
                                सोडा वाटर की बोतल में कार्बन डाइऑक्साइड गैस उच्च दाब पर भरी रहती है। जब बोतल की कार्क को खोलते हैं, तो दाब कम हो जाता है जिससे जल में घुली कार्बन डाइऑक्साइड तेजी से बुलबुले के रूप में बाहर निकलती है इसी कारण झाग उत्पन्न होते हैं।
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कई तारे बड़े होने पर भी सूर्य से बहुत छोटे क्यों दिखाई देते हैं ?

दूसरे तारों के मुकाबले सूर्य बड़ा तथा चमकीला इसलिए दिखाई देता है, क्योंकि यह दूसरे तारों की अपेक्षा करीब है। इसके विपरीत अनेक तारे सूर्य से कई गुना बड़े होते हुए भी हमें छोटे तथा कम चमकीले दिखाई देते हैं, क्योंकि वे सूर्य की अपेक्षा पृथ्वी से बहुत दूर स्थित हैं।

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प्रश्न :- बिजली क्यों चमकती है ?

प्रश्न :- पानी रंगहीन क्यों होता है ?

प्रश्न :- आकाश नीला क्यों दिखाई देता है ?

प्रश्न :- मिर्च के तीखेपन का क्या कारण है ?

प्रश्न :- हड्डियाँ क्यों चटकती है ? 

प्रश्न :- क्या परग्रही प्राणी होते हैं ? क्या ब्रह्मांड में कही पर जीवन मौजूद है ? 



प्रश्न - महिलाओं की आवाज़ सुरीली क्यों होती है ? 


प्रश्न - मिस्र के पिरामिडों का निर्माण कैसे हुआ ?


प्रश्न - मकड़ी अपने बनाये जाल में खुद क्यों नहीं फंसती ? 



प्रश्न - पृथ्वी सूर्य का चक्कर क्यों लगाती है ? 




प्रश्न :- ब्लेक होल (Black Holl ) किसे कहते हैं ? 


प्रश्न :- चन्द्र  ग्रहण क्यों होता है ?





प्रश्न :- रक्त का थक्का कैसे जमता है ?

विज्ञान प्रश्न - लाई डिटेक्टर क्या है और यह कैसे कार्य करता है ?


                  What is a lie-detector and how does it work ?




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