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Wednesday, February 4, 2015

टाईफाइड क्यों होता है ?

               
                             टाइफाइड एक तरह के जीवाणु से फैलता है। आयुर्विज्ञान की भाषा में इसे बैसिलस सेलमोनेला टायफोसा कहा जाता है। यह एक भयानक संक्रामक रोग है। बहुत पहले हजारों लोग इस महामारी से काल कलवित हो जाते थे, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान के विकास से इस पर काबू पा लिया गया है।
                             यह गंदे भोजन या गंदे पानी के साथ शरीर में प्रवेश करके खून तक पहुंच जाता है। यह खून को प्रभावित करके पूरी रक्त व्यवस्था को दूषित कर देता है। इस बीमारी में बुखार, खांसी, खाल का उधड़ना, तिल्ली का बढ़ जाना और श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी हो जाना आदि होता है। इस बीमारी में भूख भी कम लगती है और लगातार बुखार रहता है।
                               टाइफाइड के जीवाणु पकने से पहले भोजन सामग्री में भी वाहक द्वारा पंहुच सकते हैं। मक्खियां भी इन जीवाणुओं को इधर से उधर पहुंचाती हैं। टाइफाइड की बीमारी ठीक हो जाने के बाद भी शरीर में ये जीवाणु बचे रह जाते हैं। टाइफाइड की जांच के लिए विडेल टेस्ट किया जाता है। इसमें खून की जांच की जाती है।

Wednesday, November 12, 2014

क्यों आती है पैरों से बदबू ?


उतर - कोई भी व्यक्ति जब जूते निकलता है, तो उसके पैरों से अजीब सी बदबू आती है। सामान्यत: कहा जाता है कि मोजे में बंद होने के कारण दुर्गंध आती है। कुछ लोगों का यह मानना होता है कि मोजे साफ नहीं होना इस दुर्गंध का कारण होता है। दरअसल, पैरों से आने वाली दुर्गंध का मुख्य कारण वह बैक्टीरिया या जीवाणु होते हैं, जो पसीने के कारण पैरों में उत्पन्न होते हैं। ये कीटाणु पैरों में पाई जाने वाली करीब दो लाख 50 हजार स्वेद ग्रंथियों से होने वाले स्राव का सेवन करते हैं और इनकी मौजूदगी ही दुर्गंध का कारण बनती है।
                                जिन व्यक्तियों को अधिक पसीना आता है, उनके पैरों से आने वाली गंध भी काफी तीखी होती है, जबकि कम पसीने वाले व्यक्तियों के पैरों से अपेक्षाकृत कम दुर्गंध आती है। इस दुर्गंध को और बढ़ाने का काम जूते और मोजे करते हैं, जिनके कारण पसीना पैरों में भी फंस कर रह जाता है और यह गीलापन व अंधेरा बैक्टीरिया को और आकर्षित करता है। इस दुर्गंध से बचने के लिए ही व्यक्ति ऐसे मोजे पहनते हैं, जो पसीना सोखकर पैरों को सूखा रखने में मदद करते हैं।