उत्तर - हेलीटोसिस, अर्थात सांसों से बदबू आना ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में लोग सतर्क नहीं रहते हैं। आइये जानें क्यों आती है सांसों से बदबू। सांसों में आने वाली बदबू के लिए वाष्पीकृत सल्फर यौगिक जिम्मेदार होते हैं, जैसे हाइड्रोजन सल्फाईड, मिथाइल मर्कैप्टन आदि। इन यौगिकों के स्रोत ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो ऑक्सीजन के बिना भी जीवित रह सकते हैं। ये बैक्टीरिया मुख के भीतरी दीवार की कोशिकाओं, जीभ, मसूढ़ों और दांतों की संधि के बीच रहते हैं। यह स्थान इनके लिए उपयुक्त रहते हैं क्योंकि अंधेरे और शुष्क स्थान पर ही ये पलते बढ़ते हैं। इसके अतिरिक्त सिगरेट, शराब इत्यादि नशीले पदार्थों का सेवन और कुछ भोज्य और पेय पदार्थों के कारण भी सांसों से बदबू आती है। खाने में दुग्ध उत्पाद, मसालेदार खाना, शक्करयुक्त पदार्थ और कॉफ़ी इत्यादि इन बैक्टीरिया की संख्या में वृद्धि करते हैं जो सल्फर यौगिक पैदा करते हैं। मसूढ़ों में होने वाला संक्रमण और रोग भी सांसों में बदबू पैदा करते हैं। दांतों में फंसे अन्न के कणों के सड़ने के कारण से यहां बैक्टीरिया पनपते हैं और फिर यह बैक्टीरिया सल्फरयुक्त यौगिक बनाते हैं, जो सांसों में बदबू का कारण बन जाता है।
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Monday, November 17, 2014
Wednesday, November 12, 2014
क्यों आती है पैरों से बदबू ?
उतर - कोई भी व्यक्ति जब जूते निकलता है, तो उसके पैरों से अजीब सी बदबू आती है। सामान्यत: कहा जाता है कि मोजे में बंद होने के कारण दुर्गंध आती है। कुछ लोगों का यह मानना होता है कि मोजे साफ नहीं होना इस दुर्गंध का कारण होता है। दरअसल, पैरों से आने वाली दुर्गंध का मुख्य कारण वह बैक्टीरिया या जीवाणु होते हैं, जो पसीने के कारण पैरों में उत्पन्न होते हैं। ये कीटाणु पैरों में पाई जाने वाली करीब दो लाख 50 हजार स्वेद ग्रंथियों से होने वाले स्राव का सेवन करते हैं और इनकी मौजूदगी ही दुर्गंध का कारण बनती है।
जिन व्यक्तियों को अधिक पसीना आता है, उनके पैरों से आने वाली गंध भी काफी तीखी होती है, जबकि कम पसीने वाले व्यक्तियों के पैरों से अपेक्षाकृत कम दुर्गंध आती है। इस दुर्गंध को और बढ़ाने का काम जूते और मोजे करते हैं, जिनके कारण पसीना पैरों में भी फंस कर रह जाता है और यह गीलापन व अंधेरा बैक्टीरिया को और आकर्षित करता है। इस दुर्गंध से बचने के लिए ही व्यक्ति ऐसे मोजे पहनते हैं, जो पसीना सोखकर पैरों को सूखा रखने में मदद करते हैं।
जिन व्यक्तियों को अधिक पसीना आता है, उनके पैरों से आने वाली गंध भी काफी तीखी होती है, जबकि कम पसीने वाले व्यक्तियों के पैरों से अपेक्षाकृत कम दुर्गंध आती है। इस दुर्गंध को और बढ़ाने का काम जूते और मोजे करते हैं, जिनके कारण पसीना पैरों में भी फंस कर रह जाता है और यह गीलापन व अंधेरा बैक्टीरिया को और आकर्षित करता है। इस दुर्गंध से बचने के लिए ही व्यक्ति ऐसे मोजे पहनते हैं, जो पसीना सोखकर पैरों को सूखा रखने में मदद करते हैं।
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