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Wednesday, December 2, 2015

ट्रांसफार्मर से बिजली कम या ज्यादा कैसे होती है ?



                         उत्तर - ट्रांसफार्मर एक ऐसा विद्युत उपकरण है, जो ए सी विद्युत- विभवांतर को कम या अधिक करने के काम आता है। यह विद्युत्-चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। ट्रांसफार्मर में लोहे की पत्तियों से बनी हुई एक कोर होती है। इस कोर पर तांबे या एल्युमिनियम के तारों की दो कुंडलियां लपेटी जाती हैं। जिस कुंडली में विद्युतधारा भेजी जाती है, उसे प्राइमरी कॉइल कहते हैं और जिस कुंडली को विद्युत उपकरण के साथ जोड़ा जाता है, उसे सेकेंडरी कॉइल कहते हैं।
                           दोनों कुंडलियां में तारों के लपेटनों की संख्या अलग-अलग होती है। जिस ट्रांसफार्मर की सेकेंडरी कॉइल में लपेटनों की संख्या प्राइमरी कॉइल की अपेक्षा अधिक होती है, वह विद्युत विभवांतर को अधिक कर देता है। ऐसे ट्रांसफार्मर को स्टेप अप ट्रांसफार्मर कहते हैं। वहीं जिस ट्रांसफार्मर में सेकेंडरी कॉइल में लपेटनों की संख्या प्राइमरी कॉइल से कम होती है, वह विद्युत विभवांतर को कम कर देता है। इसे स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर कहते हैं। सेकेंडरी और प्राइमरी में तारों की लपेटनों की संख्या का जो अनुपात होगा, विद्युत विभवांतर भी उसी अनुपात में कम या ज्यादा होगा। एक ही ट्रांसफार्मर स्टेप अप और स्टेप डाउन दोनों प्रकार के कार्यों को करने की क्षमता वाला बनाया जा सकता है।