उत्तर - मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हमारा मस्तिष्क चेतन अवस्था में ही कार्य नहीं करता,बल्कि अवचेतन अवस्था में भी कार्य करता है। हमारी याददाश्त खो जाने पर मस्तिष्क सिर्फ वे बातें भूल जाता है, जो मस्तिष्क की चेतनावस्था में होती हैं, जैसे अपना नाम, अपना घर, कार्यस्थल इत्यादि। लेकिन उसे वे सब बातें ध्यान रहती हैं जो कि अवचेतन मस्तिष्क में मौजूद होती हैं, जैसे अपनी भाषा, पढ़ने-लिखने की क्षमता आदि। इसीलिए अपनी याददाश्त खो जाने पर भी आदमी को अपनी भाषा याद रहती है।
Showing posts with label मस्तिष्क. Show all posts
Showing posts with label मस्तिष्क. Show all posts
Sunday, September 13, 2015
प्रश्न - जब किसी आदमी की याददाश्त खो जाती है तो उसे अपनी भाषा कैसे याद रहती है ?
उत्तर - मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हमारा मस्तिष्क चेतन अवस्था में ही कार्य नहीं करता,बल्कि अवचेतन अवस्था में भी कार्य करता है। हमारी याददाश्त खो जाने पर मस्तिष्क सिर्फ वे बातें भूल जाता है, जो मस्तिष्क की चेतनावस्था में होती हैं, जैसे अपना नाम, अपना घर, कार्यस्थल इत्यादि। लेकिन उसे वे सब बातें ध्यान रहती हैं जो कि अवचेतन मस्तिष्क में मौजूद होती हैं, जैसे अपनी भाषा, पढ़ने-लिखने की क्षमता आदि। इसीलिए अपनी याददाश्त खो जाने पर भी आदमी को अपनी भाषा याद रहती है।
Monday, April 13, 2015
हमें भूख की अनुभूति क्यों होती है ?
विभिन्न दैहिक क्रियाओं के सुचारू रूप से संचालन के लिए होने वाली भूख की अनुभूति आहारनाल के क्रमाकुंचन एवं संकुचन के कारण होती है। माइक्रोविलाई की सतह पर उपस्थित संग्राहकों (Receptors) के द्वारा यह संवेद मस्तिष्क में पहुंचता है, जो कि रक्त में ग्लूकोज की कमी तथा तापमान में गिरावट, आमाशय में संकुचन आदि। इन्हीं कारणों से हमें भूख की अनुभूति होती है।
Subscribe to:
Comments (Atom)
